इस कविता में बादल के लिए ‘ ऐ विप्लव के वीर!, ‘ ऐ जीवन के पारावार’ जैसे संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। ‘ बादल राग‘ कविता के शेष पाँच खंडों में भी कई संबोधानें का इस्तेमाल किया गया है। जैसे- ‘अरे वर्ष के हर्ष !’, मेरे पागल बादल !, ऐ निर्बंध !, ऐ स्वच्छंद! , ऐ उद्दाम! , ऐ सम्राट! ,ऐ विप्लव के प्लावन! , ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार! उपर्युक्त संबोधनों की व्याख्या करें तथा बताएँ कि बादल के लिए इन संबोधनों का क्या औचित्य हैं?
संबोधनों का औचित्य: कवि इन संबोधनों के द्वारा कविता की सार्थकता को बढ़ाना चाहता है। इन संबोधनों का प्रयोग करके कवि प्रकृति का सुंदर चित्रण बहुत सारे उदाहरणों के साथ करते हुए पाठको को समझाने की कोशिश करता है।
प्रश्न में दिए गये संबोधनों की व्याख्या निम्नलिखित है।
अरे वर्ष के हर्ष ! |
ख़ुशी का प्रतीक |
मेरे पागल बादल ! |
मदमस्ती का प्रतीक |
ऐ निर्बध ! |
बंधनहीन का प्रतीक |
ऐ स्वच्छंद ! |
आजादी से घूमने वाला |
ऐ उद्दाम! |
निर्भय, भयहीन |
ऐ सम्राट ! |
अति शक्तिशाली (जैसे कोई सम्राट हो ) |
ऐ विप्लव के प्लावन! |
प्रलय या क्रांति |
ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार ! |
बच्चों के समान चंचल चरित्र |
विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते ‘ पंक्ति में ‘ विप्लव-रव ‘ से क्या तात्पर्य है ? ‘ छोटे ही है हैं शोभा पाते ‘ एसा क्यों कहा गया है ?
व्याख्या कीजिए-
(क) तिरती है समीर-सागर पर
अस्थिर सुख पर दुख की छाया-
जग के दग्ध हृदय पर
निर्दय विप्लव की प्लावित माया-
(ख) अट्टालिका नहीं है रे
आतंक-भवन
सदा पंक पर ही होता
जल-विप्लव-प्लावन,
‘अस्थिर सुख पर दुख की छाया’ पंक्ति में ‘दुख की छाया’ किसे कहा गया हैं और क्यों?
पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। आपको प्रकृति का कौन-सा मानवीय रूप पसंद आया और क्यों ?
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‘अशानि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर ‘ पंक्ति में किसकी ओर संकेत किया है ?
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भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)
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