A:
1. लेखक अतिथि को à¤à¤¾à¤µ – à¤à¥€à¤¨à¥€ विदाई देना चाहता है वह चाहता है कि जब अतिथि उसके घर से जाठवह यहाठकी à¤à¤• अचà¥à¤›à¥€ सी तसवीर अपने मन से लेकर जाता था I
2. (क) जब लेखक के घर में अनचाहा अतिथि आ गया था इस खà¥à¤¯à¤¾à¤² से कि उसे अतिथि की खूब खातिरदारी करनी पडती थी इस महगाई के दोर में घर चलाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो रहा था I
(ख) हमारी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति में अतिथि को देवता माना जाता था वह इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤•ि अतिथि जब à¤à¥€ किसी के घर आता था तो उसका आगमन किसी देवता के आगमन से कम नही माना जाता था I
(ग) घर को सà¥à¤µà¥€à¤Ÿ- होम इसलिठकहा जाता था कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को अपने घर में जो खà¥à¤¶à¥€ का माहोल मिलता था वह अनà¥à¤¯ कही नही मिलता था यही माहोल जब किसी के कारण बिगड़ता था I
(घ) लेखक अपने अतिथि को पिछले चार दिनों से à¤à¥‡à¤² रहा है à¤"र नोबत पकवान से लेकर खिचड़ी तक आ गई है दोनों के मधà¥à¤¯ वारà¥à¤¤à¤¾à¤²à¤¾à¤ª à¤à¥€ बंद हो गया है I
(ड) देवता à¤"र मनà¥à¤·à¥à¤¯ दोनों अपने अपने सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर ही अचà¥à¤›à¥‡ लगते थे देवता मंदिर में à¤"र मनà¥à¤·à¥à¤¯ समाज में अतिथि को देवता इसलिठकहा जाता था वह कही पर à¤à¥€ थोड़ी देर के लिठजाकर वहा की खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को बà¥à¤¾ देता था I