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1. गाà¤à¤§à¥€à¤œà¥€ को महादेव अपने पà¥à¤¤à¥à¤° से à¤à¥€ अधिक पà¥à¤°à¤¿à¤¯ है जब सन 1917 में वे गाà¤à¤§à¥€à¤œà¥€ के पास पहà¥à¤à¤š थे तà¤à¥€ गाà¤à¤§à¥€à¤œà¥€ ने उनको ततà¥à¤•ाल पहचान लिया था उनको अपने उतराधिकारी का पद सोप दिया था I
2. अगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹ से पीड़ित दल जब गाà¤à¤§à¥€à¤œà¥€ से मिलने आते है तब महादेव उनकी बातो की सकà¥à¤·à¤¿à¤¤ टिपà¥à¤ªà¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ तैयार करता था I
3. साहितà¥à¤¯ à¤"र ससà¥à¤•र के साथ इसका कोई सबंध नही रहा है लेकिन महादेव जी ने उसी समय से टेंगोर शरदचनà¥à¤¦ आदि के साहितà¥à¤¯ को उलटना पà¥à¤²à¤Ÿà¤¨à¤¾ शà¥à¤°à¥ कर दिया है I
4. महादेव मगनवाडी से वरà¥à¤§à¤¾ की गरà¥à¤®à¥€ में रोज़ सà¥à¤¬à¤¹ पेंदल चलकर सेवागà¥à¤°à¤¾à¤® पहà¥à¤šà¤¤à¥‡ है जाते आते पूरे 11 मील चलते है I
5. बड़े बड़े देशी विदेशी राजपà¥à¤°à¥à¤· राजनीतिजà¥à¤ž गांधीजी से मिलने आते है महादेव à¤à¤• कोने में बैठे बैठे अपनी लबीं लिखावट में सारी चरà¥à¤šà¤¾ को लिखते रहते है I