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1. पहले पद में à¤à¤—वन की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ चंदन , बादल , दीपक , मोती तथा सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ से की गई थी à¤"र à¤à¤•à¥à¤¤ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ पानी चकोर, बाती धागा à¤"र दास से की गई थी I
(2) अनà¥à¤¯ तà¥à¤•ांत शबà¥à¤¦ निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार थे I मोरा – चकोरा, बाती-राती , धागा – सà¥à¤¹à¤¾à¤—ा , दासा – रेदासा
(3) उदहारण : दीपक बाती
मोती धागा
घन मोर
चंद चकोर
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ दास
(4) दूसरे पद कवि ने गरीब निवाजॠअपने आराधà¥à¤¯ ईशà¥à¤µà¤° को कहा था जो दीन दà¥à¤–ियो पर दया करने वाला था I
(5) कवि का कहना था कि जिन लोगो को समाज अछूत मानता था जिसके छूने मातà¥à¤° से ही लोग
अपवितà¥à¤° हो जाते थे à¤"र कà¥à¤²à¥€à¤¨ लोग à¤à¥€ उन पर दया नही करते थे I
(6) रेदास जी ने अपने सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ को लाल गà¥à¤¸à¤¾à¤ˆ गोविंद तथा हरिजी आदि नामो से पà¥à¤•ारा था I
(7) शबà¥à¤¦ पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ रूप
मोरा मोर , मयूर बाती बतà¥à¤¤à¥€
चंद चंद , चनà¥à¤¦à¤®à¤¾ जोति जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ बरे जलती है
छतà¥à¤°à¥ छतà¥à¤° छोति छूत , छूना
गà¥à¤¸à¤‡à¤¯à¤¾à¤ गà¥à¤¸à¤¾à¤ˆ ,गोसाई
राती रातà¥à¤°à¤¿ , रात
धरे धारण करता है
तà¥à¤¹à¥€ तà¥à¤®à¥à¤¹à¥€