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(क) देते सà¥à¤µà¤° यदि मà¥à¤à¥‡ विधाता , अपने पतà¤à¤° के सपनों को में à¤à¥€ जग को गीत सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ था
(ख) जब शà¥à¤•à¥à¤° दल पर बैठकर गाता था तब शà¥à¤•ी निचे घोसले में बैठकर अड़े सेती हà¥à¤ˆ उसके सà¥à¤µà¤° को सà¥à¤¨à¤•र अपने मन में पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होती थी शà¥à¤• के गाने का सीधा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ शà¥à¤•ी के मन पर पड़ता था
(ग) पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€ जब साठढले आलà¥à¤¹à¤¾ गाता था दूर अपने घर में बैठी उसकी पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को उसका सà¥à¤µà¤° बरबस ही खीच लाता था à¤"र पेड़ की छाया में छिपकर गीत सà¥à¤¨ रही पà¥à¤°à¤¿à¤¯ का यही मन करता था कि काश में à¤à¥€ अपने पà¥à¤°à¤¿à¤¯ के गीत की कड़ी होती थी I
(घ) पà¥à¤°à¤¥à¤® छद में कवि ने नदी को मानवीकरण रूप में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करते हà¥à¤ उसके बहने को उसके मन की बात के रूप में रखा था उसका मानना था मनो नदी बहते हà¥à¤ अपने किनारों से बात करती हà¥à¤ˆ चलती थी वही उसके किनारे पर खिला गà¥à¤²à¤¾à¤¬ à¤à¥€ मन ही मन यही सोचता था कि यदि मà¥à¤à¥‡ à¤à¥€ सà¥à¤µà¤° मिलते थे I
(ड) कवि का कहना पशॠपकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मानो पà¥à¤°à¤•ति सà¥à¤µà¤¯ ही गीत गाती थी गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥€ थी à¤"र उनके ही माधà¥à¤¯à¤® से मानो लोगो को अपने संदेश देने की कोशिश करते थे I
(च) मनà¥à¤·à¥à¤¯ को पà¥à¤°à¤•ति हर रूप में अदोलित करती थी चाहे वह नदी का बहना हो à¤à¤°à¤¨à¥‡ को गिरना हो पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का चहचहना हो या फिर अपने हर à¤à¤°à¥‡ रूप में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती थी I
(छ) जो गाया गया था वह गीत था à¤"र जिसे गाया जाना था वह अगीत था पà¥à¤°à¤•ति या मनà¥à¤·à¥à¤¯ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤ जब मूरà¥à¤¤ रूप में लेती थी वह गीत बन
जाता था I
(ज) गीत अगीत के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कवि ने यह बताने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया था कि पà¥à¤°à¤•ति में होने वाली हर गटना à¤"र हमारे अंदर की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ à¤"र सवेदना किसी न किसी रूप में à¤à¤• दूसरे को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती थी I