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(क) 1. सà¥à¤–िया के बाहर जाने पर पिता का हà¥à¤°à¤¦à¤¯ कॉप उठता है I बहà¥à¤¤ रोकता है सà¥à¤–िया को न जा खेलने को बाहर , नही खेलना रà¥à¤•ता उसका नही ठहरती वह पल – à¤à¤° I
2. परà¥à¤µà¤¤ की चोटी पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ मंदिर की अनà¥à¤ªà¤® शोà¤à¤¾ I ऊचें शेल – शिखर के ऊपर मंदिर है विसà¥à¤¤à¥€à¤‚ण विशाल सà¥à¤µà¤°à¥à¤£ – कलश सरसिज विहसित थे पाकर समà¥à¤¦à¤¿à¤¤ रवि – कर जाल I
3. पà¥à¤œà¤¾à¤°à¥€ से पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ / फूल पाने पर सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ के पिता की मन: सà¥à¤¥à¥à¤¤à¤¿ I à¤à¥‚ल गया उसका लेना à¤à¤Ÿ परम लाठ– सा पाकर में I सोचा बेटी को माठके ये पà¥à¤£à¥à¤¯ – पà¥à¤·à¥à¤ª दू जाकर में I
4. पिता की वेदना à¤"र उसका पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¤¾à¤ª I अंतिम बार गोद में बेटी तà¥à¤à¤•ो ले न सका में हा I à¤à¤• फूल माठका पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ à¤à¥€ तà¥à¤à¤•ो दे न सका में हा I
(ख) बीमार बचà¥à¤šà¥€ ने देवी माठके चरणों के à¤à¤• फूल की पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ रूप में इचà¥à¤›à¤¾ पà¥à¤°à¤•ट की थी I
(ग) सà¥à¤–िया के पिता पर यह आरोप लगाया गया कि उसने अछूत होते हà¥à¤ देवी माठके मंदिर में घà¥à¤¸à¤•र मंदिर की पवितà¥à¤°à¤¤à¤¾ को à¤à¤— किया था I
(घ) जेल से छूटने के बाद सà¥à¤–िया के पिता ने उसे राख की ढेरी के रूप में पाया था I
(ड) कवि के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इस संसार को बनाने वाला ईशà¥à¤µà¤° à¤à¤• ही था हमने ही आपस में ऊà¤à¤š नीच के à¤à¥‡à¤¦ à¤à¤¾à¤µ पैदा किये थे à¤"र उसमे हम इतना डूब चà¥à¤•े थे तिक हमे किसी की मारà¥à¤®à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤" तक का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नही रखता था I
(च) (i) हà¥à¤°à¤¦à¤¯ – चिंताठधधकार (ii) जलते – से अंगारों से (iii) पाकर समà¥à¤¦à¤¿à¤¤ रवि – कर – जाल I
(IV) हाय फूल – सी कोमल बचà¥à¤šà¥€ (v) चिरकालिक शà¥à¤šà¤¿à¤¤à¤¾ सारी I