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1. आज देश में धरà¥à¤® à¤"र ईमान के नाम पर होने वाले वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° को रोकने के लिठसà¤à¥€ को धरà¥à¤® से ऊपर उठकर देश के बारे में सोचना था à¤"र इन लोगो को कडा जवाब देना ही था I
2. बà¥à¤§à¤¿ पर मार के सबंध में लेखक का यह मानना था कि कà¥à¤› अपने आप को मसीहा समà¤à¤¨à¥‡ वाले लोग à¤à¥‹à¤²à¥€ à¤à¤¾à¤²à¥€ जनता को धरà¥à¤® के नाम पर डराकर कबà¥à¤œà¤¾ करके अपने वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° बà¥à¤¾à¤¤à¥‡ थे I
3. लेखक के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° धरà¥à¤® की उपासना के मारà¥à¤— में कोई à¤à¥€ रà¥à¤•ावट न होती जिसका मन जिस पà¥à¤°à¤•ार चाहे उसी पà¥à¤°à¤•ार धरà¥à¤® की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को अपने मन में जगावे थे I
4. महातà¥à¤®à¤¾ गांधी धरà¥à¤® को सवतà¥à¤° सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ देते थे वे à¤à¤• पग à¤à¥€ धरà¥à¤® के बिना चलने के लिठतैयार नही था परनà¥à¤¤à¥ उनकी बात ले उड़ने से पहले पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• आदमी का करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ यह था कि वह à¤à¤²à¥€ à¤à¤¾à¤‚ति समठलेता था I
5. सबके कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ की दà¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ से आपका पूजा पाठनही देखा जाता था आपकी à¤à¤²à¤®à¤¨à¤¸à¤¾à¤¹à¤¤ की कसोटी केवल आपका आचरण होता था आपको अपने आचरण को सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¨à¤¾ पड़ता था I