A:
(1) कवि ने अगà¥à¤¨à¤¿ पथ जीवन के कठिनाई à¤à¤°à¥‡ रसà¥à¤¤à¥‡ के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• के रूप में पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया था उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पूरा जीवन à¤à¤• आग के रसà¥à¤¤à¥‡ के समान था I
(2) इन शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के बार बार पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कवि यह समà¤à¤¾à¤¨à¥‡ का पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ कर रहा था कि जीवन रà¥à¤ªà¥€ पथ पर तà¥à¤à¥‡ सà¥à¤µà¤¯ ही आगे बढना था किसी से à¤à¥€ मदद नही मागनी थी यदि तू मदद मागेगा तो सà¥à¤µà¤¯ ही कमजोर पड जाता था I
(3) कवि का आशय था कि इस जीवन के कठिन रसà¥à¤¤à¥‡ पर तू लगातार चलता कल रासà¥à¤¤à¥‡ में आने वाली छाह की तू कामना मत कर केवल अपना कारà¥à¤¯ करता रहता था I