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(1) गà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सगà¥à¤°à¤¹ करने में केशव शंकर पिलà¥à¤²à¥ˆ को बहà¥à¤¤ ही कठिनाईयों का सामना करना पडा ढेर सारी गà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सगà¥à¤°à¤¹ करना उनके लिठमà¥à¤¶à¥à¤•िल था कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि à¤à¤• तो गà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ महà¤à¤—ी होती है दूसरे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने के लिठजगह à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चहिये थी I
(2) बाल चितà¥à¤°à¤•ता करवाकर वे दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के बचà¥à¤šà¥‹ को à¤à¤• मच पर लाना चाहते थे जिससे उनकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ को निखारा जा सके à¤"र बचà¥à¤šà¥‹ को अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ मंच पर लाकर उनका उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ बढाया जा सके I
(3) बचà¥à¤šà¥‡ को देष विदेश à¤"र वहा के रीति रिवाज à¤"र पहनावे की जानकारी देने के लिठकेशव शकर पिलà¥à¤²à¥ˆ ने विशà¥à¤µ à¤à¤° गà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सगà¥à¤°à¤¹ किया I
(4) केशव शंकर पिलà¥à¤²à¥ˆ हर वरà¥à¤· छà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में कैप लगाकर सारे à¤à¤¾à¤°à¤¤ के बचà¥à¤šà¥‹ को à¤à¤• जगह पर इसलिठइकà¥à¤ टा करना चाहता थे जिससे कि वे सà¤à¥€ à¤à¤• दूसरे को जान सके अपने अपने रीति रिवाजो से à¤à¤• दूसरे को परिचित करा सके I