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(क)हरà¥à¤· à¤"र कनक दोनों इसलिठसमà¥à¤¦à¥à¤° की लहरों पर तैर सकते थे कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि दोनों बचपन से ही समà¥à¤¦à¥à¤° की गहराइयो में जाकर सोप à¤"र मोती निकालकर लाते थे I
(ख) हरà¥à¤· का पिता रंग बिरगी कोडिया , विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के सà¥à¤‚दर सà¥à¤‚दर शख à¤"र पतà¥à¤¥à¤°à¥‹à¤‚ से तरह तरह के खिलोने तरह तरह की मालाठतैयार करता था I
(ग) कनक छोटे – छोटे शंख की माला बनाकर बेचती थी ताकि वह अपनी माठकी मदद कर सके कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि उसके पिती की मृतà¥à¤¯à¥ हो चà¥à¤•ी थी I
(घ) मंजरी को कनक इसलिठनही à¤à¤¾à¤¤à¥€ थी कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि उसे समà¥à¤¦à¥à¤° में तैरना नही आता था à¤"र वह उसे हरà¥à¤· से दूर रखना चाहती थी I
(ड) मंजरी ने कनक को अपना खिलौना इसलिठदे दिया कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ कि कनक ने मंजरी की जान बचाई थी I