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(1) सà¥à¤§à¤¾ को पाà¤à¤š वरà¥à¤· की अलà¥à¤ªà¤¾à¤¯à¥ में ही मà¥à¤‚बई के पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ नà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯ विधलाय कला सदन में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ दिलवाया गया सà¥à¤§à¤¾ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ देखकर सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ नतà¥à¤¯ शिकà¥à¤·à¤• शà¥à¤°à¥€ के . à¤à¤¸ रामासà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ ने उसे शिषà¥à¤¯à¤¾ के रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर लिया à¤"र सà¥à¤§à¤¾ उनसे नियमित पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤¶à¥à¤°à¤£ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने लगी I
(2) डॉ सेठी ने सà¥à¤§à¤¾ को आशà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤ किया कि वह दà¥à¤¬à¤¾à¤°à¤¾ सामानà¥à¤¯ ढंग से चल सकेगी इस पर सà¥à¤§à¤¾ ने पà¥à¤›à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ में नाच सकूगी डॉ सेठी ने कहा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ नही पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करो तो सब कà¥à¤› सà¤à¤µ है डॉ सेठी ने सà¥à¤§à¤¾ के लिठà¤à¤• विशेष पà¥à¤°à¤•ार की टांग बनाई जो अलà¥à¤¯à¥‚मीनियम की थी à¤"र इसमें à¤à¤¸à¥€ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ थी कि वह टांग को आसानी से घà¥à¤®à¤¾ सकती थी I
(3) 28 जनवरी 1984 को मà¥à¤‚बई के साउथ इंडिया वेलफेयर सोसायटी के हाल में à¤à¤• नरà¥à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤—ना पà¥à¤°à¥€à¤¤à¤¿ के साथ सà¥à¤§à¤¾ ने दà¥à¤¬à¤¾à¤°à¤¾ नाच के सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ का आमतà¥à¤°à¤£ सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर लिया यह दिन सà¥à¤§à¤¾ जिंदगी का सà¤à¤µà¤¤ सबसे कठिन दिन था उस दिन से à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जबकि उसका पाà¤à¤µ काट दिया गया था I