Use these NCERT Solutions for Class 12 Hindi - Antral to review textbook questions and chapter-wise explanations available on SaralStudy. Curriculum verification is still being completed for this subject, so legacy chapter resources are preserved without being labelled as the current syllabus.
Chapter 1 : Sooradaas Kee Jhopadee
"सूरदास की à¤à¥‹à¤ªà¤¡à¤¼à¥€" à¤à¤• मारà¥à¤®à¤¿à¤• कहानी है जो समाज में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ गरीब-अमीर के à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ को उजागर करती है। सूरदास, जो à¤à¤• निरà¥à¤§à¤¨ और नेतà¥à¤°à¤¹à¥€à¤¨ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ है, समाज की कठिनाइयों के बीच अपनी à¤à¥‹à¤ªà¤¡à¤¼à¥€ में जीवन बिताता है। उसके पास à¤à¤²à¥‡ ही धन न हो, लेकिन उसकी आतà¥à¤®à¤¾ पवितà¥à¤° और दयालॠहै। कहानी में जब à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ उसकी à¤à¥‹à¤ªà¤¡à¤¼à¥€ को हटाने की कोशिश करता है, तो सूरदास विनमà¥à¤°à¤¤à¤¾ और सहिषà¥à¤£à¥à¤¤à¤¾ का परिचय देता है।
इस कथा के माधà¥à¤¯à¤® से लेखक पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द (Premchand) ने समाज में सहानà¥à¤à¥‚ति और मानवता के महतà¥à¤µ को रेखांकित किया है और यह बताया है कि सचà¥à¤šà¥€ संपतà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¥‡à¤® और विनमà¥à¤°à¤¤à¤¾ होती है।
Chapter 2 : Aarohan
"आरोहण" à¤à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¤• आतà¥à¤®à¤•थातà¥à¤®à¤• रचना है जो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की दृढ़ इचà¥à¤›à¤¾à¤¶à¤•à¥à¤¤à¤¿ और संघरà¥à¤·à¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ का परिचय देती है। इसमें लेखक ने अपने जीवन के कठिन दौर और उन संघरà¥à¤·à¥‹à¤‚ का उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया है, जिनके सहारे वे आगे बढ़ते गà¤à¥¤ इस अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ में 'आरोहण' का अरà¥à¤¥ कठिनाइयों के बावजूद जीवन में ऊपर उठना और नई ऊंचाइयों को छूना है।
लेखक 'संजीव (Sanjeev)' अपने अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ से पाठकों को यह सिखाते हैं कि जीवन में चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ आती हैं, लेकिन उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ना चाहिà¤à¥¤ यह अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ पाठकों को आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸ और संकलà¥à¤ª की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ देता है।
Chapter 3 : Biskohar Kee Maatee
"बिसà¥à¤•ोहर की माटी" à¤à¤• सà¥à¤‚दर यातà¥à¤°à¤¾-वृतà¥à¤¤à¤¾à¤‚त है, जिसमें लेखक विशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤¥ तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤¾à¤ ी (Vishwanath Tripathi) अपने जनà¥à¤®à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨ बिसà¥à¤•ोहर की ओर लौटते हैं और वहां की मिटà¥à¤Ÿà¥€, लोगों, और जीवन की सादगी का वरà¥à¤£à¤¨ करते हैं। इस अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ में लेखक ने अपने गाà¤à¤µ की संसà¥à¤•ृति, रीति-रिवाज, और गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ जीवन के सजीव चितà¥à¤°à¤£ किठहैं। गाà¤à¤µ की मिटà¥à¤Ÿà¥€ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤à¤ और वहाठकी सरल जीवनशैली ने लेखक को गहरे से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किया है।
यह कहानी उन जड़ों और आतà¥à¤®à¥€à¤¯à¤¤à¤¾ का परिचय कराती है, जो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को उसकी पहचान और आतà¥à¤®à¥€à¤¯à¤¤à¤¾ से जोड़ती है। पाठकों को यह कहानी गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ संसà¥à¤•ृति और पà¥à¤°à¤•ृति से पà¥à¤°à¥‡à¤® का महतà¥à¤µ समà¤à¤¾à¤¨à¥‡ का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करती है।
Chapter 4 : Apana Maalava Khaoo-Ujaadoo Sabhyata Me
यह अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ लेखक के अपने कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° 'मालवा' के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गहरे पà¥à¤°à¥‡à¤® और उसके बदलते सà¥à¤µà¤°à¥‚प के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ चिंता को पà¥à¤°à¤•ट करता है। 'अपना मालवा खाऊ-उजाड़ू सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ में' में लेखक ने अपने कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की परंपराओं, पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक सौंदरà¥à¤¯ और सांसà¥à¤•ृतिक धरोहर का बखान किया है। इसके साथ ही, लेखक आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ता और औदà¥à¤¯à¥‹à¤—िकीकरण के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ में उस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के उजड़ने और पà¥à¤°à¤•ृति के नषà¥à¤Ÿ होने पर à¤à¥€ गहरी चिंता वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करते हैं।
इस रचना के माधà¥à¤¯à¤® से लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ के विकास के साथ-साथ हमें अपनी जड़ों और परंपराओं को à¤à¥€ संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करना चाहिठताकि आने वाली पीढ़ियाठà¤à¥€ उनकी सà¥à¤‚दरता और महतà¥à¤¤à¤¾ का अनà¥à¤à¤µ कर सकें।